Published on: 28 Sep 2026
कुलपति प्रो. असीम मिगलानी बोले—केवल डिग्री नहीं, विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर 'रोजगार दाता' बनाएं।
मुख्य अतिथि प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने दिया व्यावहारिक शिक्षा, पेटेंट और भारतीय ज्ञान परंपरा को अपनाने पर ज़ोर।
4 प्रमुख विश्वविद्यालयों, मॉडल संस्कृति महाविद्यालयों व आईजीयू संबद्ध कॉलेजों के शिक्षक बनेंगे 'मुख्य प्रशिक्षक'।
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर (रेवाड़ी) में कुलपति प्रो. असीम मिगलानी और कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह के कुशल नेतृत्व एवं प्रेरणादायी मार्गदर्शन में तीन दिवसीय फैसिलिटेटर डेवलपमेंट प्रोग्राम: जनरेटिव एआई आधारित रोजगार कौशल" का विधिवत शुभारंभ हुआ। यह आयोजन 'हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद', वाधवानी फाउंडेशन (कौशल विकास नेटवर्क) तथा विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। हाइब्रिड मोड पर आधारित इस कार्यक्रम का प्रथम दिवस विश्वविद्यालय परिसर में प्रत्यक्ष (ऑफलाइन) आयोजित हुआ, जबकि आगामी दो दिनों का प्रशिक्षण ऑनलाइन माध्यम से दिया जाएगा।
इस कार्यक्रम में प्रदेश के चार प्रमुख विश्वविद्यालयों—गुरुग्राम विश्वविद्यालय, आईजीयू मीरपुर, श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय (पलवल) और जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (फरीदाबाद)—सहित मॉडल संस्कृति महाविद्यालयों व आईजीयू से संबद्ध विभिन्न कॉलेजों के शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रशिक्षण उपरांत प्रमाण पत्र प्राप्त कर ये शिक्षक 'सुगमकर्ता' (Facilitator) एवं मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका निभाएंगे। ये शिक्षक अपने-अपने संस्थानों से अंतिम वर्ष (Final Year) के विद्यार्थियों के बैच बनाकर देंगे, जिसमें प्रति बैच न्यूनतम 50 तथा अधिकतम 600 विद्यार्थी शामिल होंगे। इसके पश्चात वाधवानी ग्रुप के विशेषज्ञ इन विद्यार्थियों को निशुल्क (Free of Cost) रोजगार कौशल का प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को 'भविष्य के लिए तैयार' (Ready for Future) बनाना है। अंकपत्र के साथ-साथ साक्षात्कार कौशल, टीम वर्क और समस्या समाधान की क्षमता आज के दौर की मुख्य आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान करते हुए कहा कि कक्षा-शिक्षण को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर वास्तविक दुनिया की व्यावहारिक चुनौतियों से जोड़ें और छात्रों में नवाचार की सोच विकसित करें। उन्होंने अध्यापकों से 'परिवर्तन का वाहक' बनकर युवाओं को केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि 'रोजगार दाता' बनाने पर बल दिया और सफल आयोजन के लिए पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं।
मुख्य अतिथि प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा (अध्यक्ष, हरियाणा राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद) ने कहा कि व्यावहारिक और हस्तकौशल से कार्य करने वाला व्यक्ति ही समाज में वास्तविक योगदान देता है। उन्होंने 'कौशल भारत', एमएसएमई, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा अनुभवात्मक शिक्षण को अध्यापन से जोड़ने पर विशेष बल दिया। साथ ही, उन्होंने शोधकर्ताओं से अपने शोध का एकाधिकार (पेटेंट) कराने की अपील करते हुए महान वैज्ञानिक सर जगदीश चंद्र बोस का प्रेरक प्रसंग साझा किया।
उद्घाटन सत्र के समापन पर कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने मुख्य अतिथि एवं समस्त आगंतुकों का औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अपने पाठ्यक्रम को रोजगारपरक बनाने हेतु उद्योग विशेषज्ञों के सुझावों को शामिल कर रहा है। परिसर में संचालित कौशल विकास केंद्र एवं विभिन्न एमओयू (MoUs) के जरिए विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इससे पूर्व, अधिष्ठाता अकादमिक मामले प्रो. सुनील कुमार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए शिक्षकों को मेंटर व सुगमकर्ता की भूमिका निभाने का संदेश दिया। तकनीकी सत्र में वाधवानी फाउंडेशन की मुख्य प्रशिक्षक सुश्री प्रियंका पवार ने कक्षा शिक्षण में जनरेटिव एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग का गहन प्रशिक्षण प्रदान किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन एसईपीडी (SEPD) केंद्र की निदेशक एवं संयोजिका डॉ. रितु बजाज की देखरेख में संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रो. पंकज त्यागी, डॉ. रमेश, प्रो. दीपक गुप्ता, डॉ. विपिन, डॉ. ममता, डॉ. संदीप पुरवा सहित विभिन्न संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष व प्रतिभागी शिक्षक उपस्थित रहे।