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नशा मुक्त भारत' का संकल्प अभियान के तहत व्याख्यान का आयोजन ।

Published on: 23 Apr 2026

*'नशा मुक्त भारत' का संकल्प अभियान के तहत व्याख्यान का आयोजन ।* 


​इन्दिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर, रेवाड़ी के हिंदी विभाग में *'नशा मुक्त भारत अभियान*' के तहत एक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता डॉ. बीरेंद्र सिंह (नशा मुक्त भारत अभियान - नोडल अधिकारी, आईजीयू, मीरपुर) को विभागाध्यक्ष डॉ मंजु पुरी ने पौधा देकर स्वागत किया। भारतीय संस्कृति के अनुरूप छात्राओं ने मुख्य वक्ता को तिलक लगाकर अभिनंदन किया। मुख्य वक्ता डॉ. बीरेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में नैतिकता और चारित्रिक बल पर जोर देते हुए कहा कि- साहित्य और समाज का गहरा नाता है। युवा पीढ़ी हमारे देश की रीढ़ है, और यदि यह रीढ़ नशे की गिरफ्त में आ गई, तो राष्ट्र का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। नशा केवल शरीर को नहीं, बल्कि मनुष्य की संवेदनाओं और उसकी सोचने-समझने की शक्ति को भी मार देता है। हमें 'नशा मुक्त भारत' के सपने को हकीकत में बदलने के लिए अपनी जड़ों और संस्कारों की ओर लौटना होगा।

उन्होंने नशे के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक पहलुओं के माध्यम से विस्तार से बताया कि नशा किस तरह व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार और भविष्य को नष्ट कर देता है। 'नशा मुक्त भारत' केवल एक सरकारी अभियान नहीं बल्कि एक जन आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने चार केस स्टडी के माध्यम से समझाते हुए कहा कि - नशा किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि स्वयं में एक भयंकर समस्या है। आज का युवा क्षणिक आनंद के लिए नशे के जाल में फंस रहा है, जो अंततः उसे एकाकीपन और अवसाद की ओर धकेलता है। एक जागरूक नागरिक ही अपने परिवार और आस-पड़ोस को इस बुराई से बचा सकता है। यदि हम शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य के प्रति सजग रहेंगे, तभी एक सशक्त और समृद्ध भारत की कल्पना साकार हो सकेगी।

​कार्यक्रम का सफल संयोजन डॉ. शकुंतला द्वारा किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि इस अभियान को विश्वविद्यालय की दीवारों से बाहर निकालकर समाज के हर घर तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है। इस अवसर पर एकजुट होकर नशा मुक्त समाज बनाने पर बल देते हुए उपस्थित सभी प्राध्यापकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने' *स्वस्थ भारत - समृद्ध भारत- नशा मुक्त भारत* ' के नारे के साथ शपथ ली। कार्यक्रम के अंत मे वैशाली (शोधार्थी हिंदी विभाग) द्वारा सभी का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर हिंदी विभाग के सभी प्राध्यापक, विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित रहे।