Published on: 25 Sep 2026
विद्यार्थियों ने ‘स्वच्छता’ एवं ‘स्वस्थ भारत, स्वच्छ भारत’ अभियान के तहत ग्रामीणों को स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण के प्रति किया जागरूक।
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी के समाज कार्य विभाग द्वारा ‘सतत विकास लक्ष्य दिवस’ के अवसर पर ‘स्वच्छता’ एवं ‘स्वस्थ भारत, स्वच्छ भारत’ अभियान के अंतर्गत मीरपुर गांव में एक दिवसीय जागरूकता रैली एवं नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण समुदाय को स्वच्छता, स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा सतत विकास लक्ष्यों में सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करना रहा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने अपने प्रेरणादायक संदेश में कहा कि सतत विकास लक्ष्य केवल वैश्विक दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि ये मानव सभ्यता के सुरक्षित एवं समृद्ध भविष्य का रोडमैप हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी लक्ष्य तब तक पूर्ण नहीं हो सकता जब तक कि उसे स्थानीय स्तर पर लागू न किया जाए। समाज कार्य विभाग के विद्यार्थियों का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है, जो इन वैश्विक लक्ष्यों को धरातल पर ग्रामीण अंचलों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
कुलपति महोदय ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय सदैव अपने सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग रहा है और ऐसे अभियानों से विद्यार्थियों में न केवल नेतृत्व क्षमता का विकास होता है बल्कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव के संवाहक भी बनते हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार को आगे भी इस तरह की जन-कल्याणकारी पहलों को निरंतर जारी रखने के लिए प्रेरित किया।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. दिलबाग सिंह ने अपने संदेश में कहा कि ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत’ की संकल्पना सतत विकास की आधारशिला है। जब तक हर नागरिक अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को नहीं समझेगा, तब तक एक स्वस्थ और समृद्ध समाज का निर्माण संभव नहीं है। विद्यार्थियों की ऐसी सामुदायिक पहल ग्रामीण भारत को जागरूक और सशक्त बनाने में निर्णायक भूमिका निभाती है।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर समाज कार्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. सतीश ने रैली को हरी झंडी दिखाकर विश्वविद्यालय परिसर से मीरपुर गांव की ओर रवाना किया। उन्होंने विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना किसी एक व्यक्ति का कार्य नहीं, बल्कि यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
रैली के दौरान विद्यार्थियों ने हाथों में स्लोगन पट्टिकाएं लेकर “आओ मिलकर पेड़ लगाएं, धरती को स्वर्ग बनाएं” तथा “स्वच्छता को अपनाना है, बीमारी को भगाना है” जैसे गगनभेदी नारों के माध्यम से ग्रामीणों को स्वच्छ एवं स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए प्रेरित किया।
अभियान के दौरान सतत विकास लक्ष्य-3 (अच्छा स्वास्थ्य और जीवनस्तर), सतत विकास लक्ष्य-6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता), सतत विकास लक्ष्य-13 (जलवायु कार्रवाई) तथा सतत विकास लक्ष्य-16 (शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएं) सहित विभिन्न वैश्विक लक्ष्यों को स्थानीय आवश्यकताओं से जोड़कर ग्रामीणों को जागरूक किया गया।
गांव के मुख्य स्थलों पर समाज कार्य विभाग के विद्यार्थियों—आशा, मंजू बाला, नेहा, मनीषा, शुभम, मनोज एवं संगीता दयाल—द्वारा एक प्रभावकारी नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने व्यक्तिगत स्वच्छता, स्वच्छ जल, पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को अत्यंत व्यावहारिक ढंग से दर्शाया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में विभागाध्यक्ष प्रो. सतीश एवं विभाग की फैकल्टी सुश्री मनीषा का विशेष योगदान रहा।
विभागाध्यक्ष प्रो. सतीश ने बताया कि समाज कार्य विभाग का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ सामाजिक सरोकारों और ग्राउंड-लेवल की सामुदायिक सहभागिता से जोड़ना है। यह अभियान सतत विकास लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा देने और ग्रामीण सहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ।