Published on: 27 Jul 2026
*कुलपति ने अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक एवं शोधकर्ताओं के साथ की बैठक, गुणवत्तापूर्ण शोध परियोजनाओं पर दिया जोर।*
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी के कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास (Research and Development Cell) प्रकोष्ठ के निदेशक तथा विभिन्न विभागों के शोधकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर उन्हें उच्च गुणवत्ता एवं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर की वित्तपोषित परियोजनाओं के प्राप्त होने पर बधाई दी।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान उसके उत्कृष्ट शोध कार्यों और नवाचारों से होती है। उन्होंने शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि सभी शोधकर्ता अपने अनुसंधान परियोजनाओं (Research Projects) को पूर्ण समर्पण, गुणवत्तापूर्ण कार्य एवं सर्वोत्तम प्रयासों के साथ पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परियोजना समयबद्ध, परिणामोन्मुख तथा समाजोपयोगी होनी चाहिए, ताकि विश्वविद्यालय की शोध उपलब्धियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने शोधकर्ताओं को नवीन शोध विषयों पर कार्य करने, पेटेंट, प्रकाशनों तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध से न केवल विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार होगा, बल्कि समाज एवं राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
बैठक के दौरान अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर पंकज कुमार त्यागी ने विश्वविद्यालय में संचालित शोध गतिविधियों, वर्तमान परियोजनाओं तथा भविष्य की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने विभिन्न वित्तपोषण एजेंसियों द्वारा उपलब्ध अनुसंधान अनुदान योजनाओं एवं शोध परियोजनाओं की तैयारी संबंधी आवश्यक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला।
बैठक में उपस्थित शोधकर्ताओं ने अपने शोध कार्यों, प्रस्तावित परियोजनाओं तथा शोध के दौरान आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। कुलपति ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया तथा आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय शोध कार्यों के लिए अनुकूल वातावरण एवं आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।
बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह एवं अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले प्रोफेसर सुनील कुमार ने भी सभी शोधकर्ताओं को उनकी शोध परियोजनाओं के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शोधकर्ताओं का उत्साहवर्धन करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि शोधकर्ताओं के उत्कृष्ट कार्यों से विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति और अधिक सशक्त होगी तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन अनुसंधान कार्यों को सफल बनाने हेतु हरसंभव सहयोग एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराता रहेगा।
इस अवसर पर प्रोफेसर रश्मि पुंडीर, सहायक कुलसचिव डॉ. अंशु, अकाउंट ऑफिसर एस.एन. शर्मा सहित सभी शोधकर्ता उपस्थित रहे।
*शिक्षकों को शोध परियोजनाओं से करीब एक करोड़ 37 लाख का अनुसंधान अनुदान प्राप्त।*
विश्वविद्यालय के विभिन्न शिक्षण विभागों के शिक्षकों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय वित्तपोषण एजेंसियों द्वारा शोध परियोजनाओं से करीब ₹ एक करोड़ 37 लाख का अनुसंधान अनुदान स्वीकृत किया गया है।
विश्वविद्यालय की कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की प्रो. सविता कुमारी श्योराण को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की Research Promotion Scheme के अंतर्गत ₹33.40 लाख का अनुदान तीन वर्षों के लिए स्वीकृत हुआ है।
प्राणी विज्ञान (जूलॉजी) विभाग की डॉ. श्रुति त्यागी को हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद (HSHEC) के हरियाणा स्टेट रिसर्च फंड (HSRF) के अंतर्गत ₹28.24 लाख का अनुदान दो वर्षों के लिए प्राप्त हुआ है।
भौतिकी विभाग के डॉ. मनोज कुमार को भी हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद (HSHEC) के हरियाणा स्टेट रिसर्च फंड (HSRF) के तहत ₹9 लाख का अनुदान दो वर्षों के लिए स्वीकृत किया गया है।
अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. सतीश कुमार को हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद (HSHEC) के हरियाणा स्टेट रिसर्च फंड (HSRF) के अंतर्गत ₹13.00 लाख का अनुसंधान अनुदान दो वर्षों के लिए प्राप्त हुआ है।
भौतिकी विभाग से डॉ. सुनील कुमार को हरियाणा राज्य विज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से ₹16 लाख का अनुसंधान अनुदान 3 वर्षों के लिए प्राप्त हुआ है।
फार्मेसी विभाग से प्रोफेसर सुनील कुमार को नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड की ओर से हर्बल गार्डन के लिए ₹5.40 लाख का अनुसंधान अनुदान 1 वर्ष के लिए प्राप्त हुआ है।
भौतिकी विभाग से डॉ. कविता यादव को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से ₹1.8 लाख का अनुसंधान अनुदान 3 वर्षों के लिए प्राप्त हुआ है।
गणित विभाग से डॉ. महावीर बड़क को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाऊंडेशन (ANRF) की ओर से ₹30 लाख का अनुसंधान अनुदान 5 वर्षों के लिए प्राप्त हुआ है।
इन परियोजनाओं से कुल मिलाकर विश्वविद्यालय को करीब ₹ एक करोड़ 37 लाख का अनुसंधान अनुदान प्राप्त हुआ है, जो विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट शोध संस्कृति एवं अकादमिक गुणवत्ता का प्रमाण है।