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आईजीयू में "एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के युग में संचार और लेखन" पर कार्यशाला आयोजित। कुलपति प्रो. असीम मिगलानी के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में आयोजित हुआ कार्यक्रम।

Published on: 04 Nov 2026

इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी के अंग्रेजी विभाग के तत्वावधान में कुलपति प्रो. असीम मिगलानी के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में “एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के युग में संचार और लेखन: उभरती प्रवृत्तियाँ, चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों को एआई के बदलते स्वरूप, संचार व लेखन में इसके व्यावहारिक उपयोग तथा इससे जुड़ी उभरती चुनौतियों के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम में सोल्यूशन बोउल कंपनी, गुरुग्राम के सीईओ श्री मोहित नारंग तथा प्रोफेसर ऑफ़ प्रैक्टिस प्रो. विवेक वार्ष्णेय मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. असीम मिगलानी ने सफल आयोजन के लिए अंग्रेजी विभाग को बधाई देते हुए कहा कि एआई वर्तमान दौर की एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीक है। यदि विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षक इसका सही दिशा में प्रयोग करें, तो यह ज्ञानवर्धन और विषयों की गहरी समझ विकसित करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। कुलपति महोदय ने आगे कहा, "तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह मानव मस्तिष्क और मौलिक सोच का विकल्प नहीं बन सकती। हमें एआई को एक सहयोगी उपकरण के रूप में अपनाना चाहिए, न कि अपनी मौलिकता और बौद्धिक क्षमता के प्रतिस्थापन के रूप में। साक्षात्कार की तैयारी, शैक्षणिक विकास, गुणवत्तापूर्ण शोध और ज्ञान के प्रसार में इसका संतुलित उपयोग आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।"

विशिष्ट अतिथि एवं अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले, प्रो. सुनील कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में एआई के साथ कदमताल करना अनिवार्य हो गया है। यदि हम इस तकनीक को नहीं अपनाएंगे तो बदलते दौर में पीछे रह सकते हैं। हालांकि, उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि इसका विवेकहीन और अनियंत्रित प्रयोग घातक परिणाम भी दे सकता है।

मुख्य वक्ता प्रो. विवेक वार्ष्णेय ने एआई के विभिन्न प्रकारों, एल्गोरिदम और व्यावसायिक क्षेत्रों में इसके अनुप्रयोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने एआई की सीमाओं, डेटा गोपनीयता तथा लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) की कार्यप्रणाली से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा कीं।

वहीं दूसरे मुख्य वक्ता श्री मोहित नारंग ने एआई के उपयोग में मानवीय विवेक और अंतःकरण की शुद्धता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बुद्धि, मन, चित्त और अहंकार के संदर्भ में मानवीय चेतना की भूमिका समझाते हुए एआई के जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रेरित किया। साथ ही, उन्होंने लेखन प्रक्रिया में एआई के उपयोग से जुड़े विभिन्न चरणों और उससे संबंधित 'फेयर्स (FAIRS)' की अवधारणा पर भी चर्चा की।

इससे पूर्व, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रोमिका बत्रा सुखीजा ने अपने स्वागतीय संबोधन में सभी अतिथियों का अभिनंदन किया। कार्यशाला के समापन सत्र में डीन फैकल्टी ऑफ ह्यूमैनिटीज प्रो. निखिलेश यादव ने पूरे आयोजन का सार प्रस्तुत करते हुए मुख्य वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उद्घाटन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. बिजेंद्र सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला का कुशल मंच संचालन शोधार्थी स्वाति यादव एवं विद्यार्थी पारस ने किया।

कार्यशाला का मुख्य संदेश यही रहा कि एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) मानव की रचनात्मकता और ज्ञान-विस्तार का एक अत्यंत प्रभावी माध्यम बन सकती है, बशर्ते इसका उपयोग मौलिकता, नैतिकता, तथ्यात्मक विश्वसनीयता और मानवीय विवेक को केंद्र में रखकर किया जाए।

*कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित रहे:*

शोध एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. पंकज त्यागी, विधि विभाग के अधिष्ठाता प्रो. तेज सिंह, हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजु पुरी, डॉ. शकुंतला, डॉ. अविनाश, डॉ. मुकुट अग्रवाल, डॉ. विनीत यादव, भाविका सैनी, विनय यादव, रोहित, निशा, शुभम, विक्रम सिंह सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी भारी संख्या में उपस्थित रहे।